मेहनत करो तो सबसे बेहतर

आलस एक बीमारी है …..

क़िस्मत की मेहनत केवल इतनी रिश्तेदारी है

क़िस्मत पर मेहनत हमेशा पड़तीबहुत भारी है …

…सफलतम आयोजनम

नवीनतम प्रखरतम

अति उत्तम प्रयोजन्नम….

चंदनम वंदनम

फूल पुष्प सरस्वती कंदमम…..

अति विशिष्ट उत्त्सवम आयोजन्नम

प्रविनतम

अनुगृहीतम अनुगृहीतम

विशेषतम अनुगृहीतम….

राहुल आनंद ….

My sister

Many times you are like mom

That’s why we are now so strong…

Many times u are like teacher

That’s why I have knowledge in my pitcher

Many times you have guided me along

That’s why I know the difference between right and wrong

Many times u have corrected my mistake

That’s why on my success path I have been allowed to off take ….

You are always there up to the core

I cannot ask for any more

Rahul Anand

माँ सी माँ….

हे ईश्वर तेरी रचना व सृष्टि पर कब किसने सवाल उठाए …

हर हाल में तुझे धन्यवाद दे ये इंसा अपना जीवन बिताए …

पर तेरी बनायी सृष्टि में कुछ पेंच मेरी समझ नहीं आये..

यकायक मेरे मन ने कई सवाल उठाए….

माँ की ममता से तूने हर बच्चे को नवाज़ा

फिर उम्र के अंतिम पड़ाव में माँ को भी बच्चा सा ही बनाया ..

किंतु किंतु किंतु

ममता का ज़िम्मा ईस अवस्था में तूने किसी को नहीं थमाया….

क्यूँ नहीं हमें (बेटों को) भी तेरी व्यवस्था में माँ सा बनाया …

क्यूँ नहीं तूने बेटों को ममता के उपहार से नवाजा

क्यों नहीं क्यूँ नहीं हम माँ की माँ सा बन सकते…..
कहाँ से लाएँ हम माँ के लिए
वो माँ सा प्यार
वो वो माँ सा दामन
वो माँ सी ममता
वो माँ सी फ़िकर
वो माँ सा जिगर

कहाँ से लाएँ हम अपने में वो
वो माँ सी माँ
माँ के लिए????

मेरा सलाम शायरों के नाम

एक ही विषय पर 5 शायरों का अलग नजरिया….

Va हर नज़रिए पर मेरा अपना एक अलग नज़रिया

bold Mein जरूर पढें :-

1- *Mirza Ghalib*: 1797-1869

“शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर

या वो जगह बता जहाँ ख़ुदानहीं

इबादत करने दे , राहुल मुझे नशे में रह कर …

या वो काम बता दे जिसमें नशा ना हो ….

2- *Iqbal*: 1877-1938

“मस्जिद ख़ुदा का घर है, पीने की जगह नहीं , काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं।”

ये जहाँ खुदा का घर है .. मस्जिद सिर्फ़ नहीं. …

काफ़िर हुआ तो क्या वो इस जहाँ में वो नहीं ..

3- *Ahmad Faraz*: 1931-2008

“काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देख कर, खुदा मौजूद है वहाँ, पर उसे पता नही

काफ़िर के दिल में झाँक और गुफ़्तगू कर ले ….

उसका खुदा कोई और है बस तुझको पता नहीं… …….

4- *Wasi*:1976-present

“खुदा तो मौजूद दुनिया में हर जगह है,

तू जन्नत में जा वहाँ पीना माना नहीं

खुदा की दुनिया को जन्नत से कम ना मान….

जहाँ जी करे राहुल

बस तू पी वहीं बैठ कर..

5- *Saqi*: 1986-present

“पीता हूँ ग़म-ए-दुनिया भुलाने के लिए,

जन्नत में कौन सा ग़म है इसलिए वहाँ पीने में मजा नही।”…..

ग़म का बहाना ना कर पीने के लिए राहुल…..

ख़ुशी भी एक नशा जिसे तू ढूँढता फिरे

हिन्दी उर्दू ….

I have received the following few lines on social media as BIG question – सवाल ????

After that I have given the answer in my own words as जवाब।……

सवाल

उर्दू है मेरा नाम मैं खुसरो की पहेली।मैं मीर की हमराज हूं गालिब की सहेली।

डेक्कन के वली ने मुझे गोदी में खिलाया।सौदा के कसीदों ने मेरा हुस्न बढ़ाया।

है मीर की अाज़मत कि मुझे चलना सिखाया।मैं दाग़ के आंगन में खिली बन के चमेली।।

गालिब ने बुलंदी का सफ़र मुझको सिखाया।हाली ने मुरव्वत का सबक याद दिलाया।इकबाल ने आइना ए हक मुझको दिखाया।

मोमिन ने सजाई मेरे ख्वाबों की हवेली।

है ज़ौक की अजमत के दिए मुझको सहारे।
चकबस्त की उल्फत ने मेरे ख्वाब संवारे।

फ़ानी ने सजाए मेरी पलकों पे सितारे।

अकबर ने रचाई मेरी बेरंग हथेली।

क्यों मुझको बनाते हो तआस्सुब का निशाना।
मैंने तो कभी खुद को मुसलमान न माना

&

ng>मेरा जवाब

हिन्दी है मेरा नाम और तू (उर्दू) है मेरी सहेली …,

जब तू थी अपने शबाब पर तब मैं तेरे दामन में खेली …..,


चं
>र किया

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कसिदों ने तेरा हुस्नग़ालिब ने तुझे बुलंदियों पर पहुँचाया

तो कबीर ने मुझसे इंसा को आइना दिखाया.बनाए कोई तुझे यहाँ निशाना नहीं आया है अब तक वो ज़माना

ना तूने अपने आ मुसल माना /strong>
ना मैंने
आप
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यह तो बस कुछ
का है फँसानाजिन्हें चाहिए बस लड़ने का बहाना ….हिंदुस्तान तेरा मेरा और अठहिस बहनो का है ठिकाना …….

नहीं हम में कोई बेगाना…

ong>तूने कहा तू अकेली है

मुझे लगता है कैसी यह पहे

अपने ही घर में कैसे
हो गयी अकेली …..

राहुल आनंद

दो लाइन ….

यह मोहब्बत ओर इबारत की सर जमीं है….. ईसे इस्तिरार और इबरत से ना जोड़ो सनम….

 ग़ुरूर

ए मेरे ग़ुरूर

तुझको ग़ुरूर ए नभ है……

तो मुझको ग़ुरूर ए नब … ..

तू भी नशे में है राहुल ……

तो मैं भी पिये हुए हुँ…….

तुझको अकड़ने का शौक़ है …..

तो मुझे झुकने में मौज है……..

तू भी अपने में सिद्ध है  गर राहुल …..

तो मैं भी ज़िद पे हूँ…

Rahul

ख़्वाब

मैंने ख़्वाब देखे ख़्वाबों ने मुझको देखा ………………………….                    बस आँखे मिली और हम साथ हो लिये…..

ज़िंदगी की दौड़ में हमें, जिन साथियों ने देखा……………

ऊन साथियों ने पुछा सोए थे तुम कहाँ, कहाँ  इन ख़्वाबों को देख लिए …..

हमने कहा पता नहीं, कहाँ सोए हम राहुल………………….                बस ये पता है की इन ख़्वाबों को हम,  ईसी जीवन के साथ जी लिए ।…..राहुल

राष्ट्र …धृतराष्ट्र

पक्ष विपक्ष की चर्चा काफ़ी सुनी है और कई लोग कहते है की यही डिमॉक्रेसी है…. पता नहीं….

आरोप प्रत्यारोप का स्तर निचले चरम पर है,  यह हमें और कहाँ तक ले जाएगा…… पता नहीं ….. 

दल बे दल (independents) सभी अपने हिसाब से जोड़ बाक़ी गुना भाग करते हैं पर देश के लिए जो सही हैं (चाहे वो कोई भी करे ) उसका हिसाब बराबर (=) कौन करेगा….पता नहीं….  

सत्य असत्य के भ्रम में सभी एसे उलझ गाएँ हैं की डोर का छोर सूझे नाहीं …… अब ईस माँझे को सुलझाने का काम कौन करेगा …. पता नहीं….

पूत सपूत कपूत का सब भेद मिट गया है ,  अपने स्वार्थ निजाता और जात के फेर में , कई कपूतों के बीच सपूत का चयन कौन करेगा …  पता नहीं……

लेकिन कोई ईस सब से दूर हर समय हर दल से किसी ना किसी तरह से राष्ट्र का निर्माण कर्ता रहा है  … दलगत राजनीति से परे उनका समान कौन करेगा ……पता नहीं ……

राष्ट्र धृतराष्ट्र से घिरा है …………… ईस …..पता नहीं …….         का पता कौन लगाएगा …..मुझे पता है …..

यह वही कर सकता है जो परिवारवाद , जातिवाद से परे धर्म की स्थापना हेतु राष्ट्र निर्माण के लिए अविरल भाव से सतत प्रयास  करे जो हर समय सत्य के रास्ते पर चले ……जैसे गांधी जी, सरदार पटेल ,शास्त्री जी , jaiprakash ji ,Atal ji aur Modi ji …. 

एक व्यक्ति जिसकी ऑपज़िशन भी तारीफ़ करें ……जो २४ घंटे देश सेवा करे ……. जो sarhad पर दिवाली मनाए…. जो देश विदेश में समान कमाएँ ……जो दुश्मन के शीश झुकाए…………जो आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएँ … जिसके कामों की फ़ेहरिस्त यहाँ ना समायें………उसका विरोध क्यों करें …. बस अब यही …….पता नहीं …..

मित्रों 

आओ  करें  राष्ट्र अभिवादन,  आओ करे राष्ट्र आराधना ….

यही हैं राष्ट् सामवर्धन  यही हैं राष्ट्र निर्माननन…..

जय हिंद……  

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