क़ोयल

जो नहीं जानते
उनके लिए …

क़ोयल पर दो लाइन

क़द सावाँला
चित्र भी सुन्दर
ज़बा पे मीठी बोली ….

भया बावला
दूजा पंछी
घोंसले जिस बीच
उसने ज़िंदगी
अपनी जीलि

वहम है
ग़ालिब
तू किसे समझता है अपना

फ़हम
भी ग़लत है आशियाने का इक़बाल…..

अहम है
जो मानने नहीं देता
वर्ना परिंदो में
है क़ोयल भी बेशुमार……