Covid 2

एक लाचारी ने ऐसा घेरा
टूट रहा अब सम्बल मेरा ….

किसी की कोई मदद नहीं कर पा रहे हैं
जीवन तो दूर
मृत्यु को भी सम्मान नहीं दे पा रहें

खाना पानी तो दूर हवा भी नहीं दे पा रहें

पहले परीक्षण
फिर परिणाम
सभी पे जैसे लगा हो अल्प विराम….

कुछ भी करके
कैसे भी चढ़ के
बेड और दवाई
किसी को नहीं पता कैसे जाए मँगाई

रात को नींद नहीं आती
मदद नहीं कर पाने की टीस सताती

फ़ोन की घंटी
मेसिज की पिंग
लगती है जैसे किसी की टूटी स्ट्रिंग ….

ये मानना है मुश्किल क्या ये धराधीश के लिए भी है ये मुश्किल

आओ कुछ तो करें
टूटे संबल को जोड़ें

Rahul Anand

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