जो भी मिला बस इसिलिये मिला …
क्योंकी हंस के बहुत कुछ खोया हमने ..
समय समय पर प्रीती खोयी ..
घर आये तो मुन्नु सोया
बार बार बस रहे सनक में
घर की खनक को खोया हमने
यार भी छूटे बार भी छोड़ा
निन्द्रारानी जो सबको प्यारी
उस निनी को खोया हमने …
बाबा छूटे पापा छूटे माँ भी छूटी …
झील भरी थी आँखों में हरदम
लेकिन
एक ना कतरा रोया हमने..
ये जो सुरज देख रहे हो
य़ारों ….
जुगनु जुगनु बोया हमने …