हे ईश्वर तेरी रचना व सृष्टि पर कब किसने सवाल उठाए …
हर हाल में तुझे धन्यवाद दे ये इंसा अपना जीवन बिताए …
पर तेरी बनायी सृष्टि में कुछ पेंच मेरी समझ नहीं आये..
यकायक मेरे मन ने कई सवाल उठाए….
माँ की ममता से तूने हर बच्चे को नवाज़ा
फिर उम्र के अंतिम पड़ाव में माँ को भी बच्चा सा ही बनाया ..
किंतु किंतु किंतु
ममता का ज़िम्मा ईस अवस्था में तूने किसी को नहीं थमाया….
क्यूँ नहीं हमें (बेटों को) भी तेरी व्यवस्था में माँ सा बनाया …
क्यूँ नहीं तूने बेटों को ममता के उपहार से नवाजा
क्यों नहीं क्यूँ नहीं हम माँ की माँ सा बन सकते…..
कहाँ से लाएँ हम माँ के लिए
वो माँ सा प्यार
वो वो माँ सा दामन
वो माँ सी ममता
वो माँ सी फ़िकर
वो माँ सा जिगर
कहाँ से लाएँ हम अपने में वो
वो माँ सी माँ
माँ के लिए????