I have received the following few lines on social media as BIG question – सवाल ????
After that I have given the answer in my own words as जवाब।……
सवाल
उर्दू है मेरा नाम मैं खुसरो की पहेली।मैं मीर की हमराज हूं गालिब की सहेली।
डेक्कन के वली ने मुझे गोदी में खिलाया।सौदा के कसीदों ने मेरा हुस्न बढ़ाया।
है मीर की अाज़मत कि मुझे चलना सिखाया।मैं दाग़ के आंगन में खिली बन के चमेली।।
गालिब ने बुलंदी का सफ़र मुझको सिखाया।हाली ने मुरव्वत का सबक याद दिलाया।इकबाल ने आइना ए हक मुझको दिखाया।
मोमिन ने सजाई मेरे ख्वाबों की हवेली।
है ज़ौक की अजमत के दिए मुझको सहारे।
चकबस्त की उल्फत ने मेरे ख्वाब संवारे।
फ़ानी ने सजाए मेरी पलकों पे सितारे।
अकबर ने रचाई मेरी बेरंग हथेली।
क्यों मुझको बनाते हो तआस्सुब का निशाना।
मैंने तो कभी खुद को मुसलमान न माना
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ng>मेरा जवाब
हिन्दी है मेरा नाम और तू (उर्दू) है मेरी सहेली …,
जब तू थी अपने शबाब पर तब मैं तेरे दामन में खेली …..,
चं
>र किया
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कसिदों ने तेरा हुस्नग़ालिब ने तुझे बुलंदियों पर पहुँचाया
तो कबीर ने मुझसे इंसा को आइना दिखाया.बनाए कोई तुझे यहाँ निशाना नहीं आया है अब तक वो ज़माना
ना तूने अपने आ मुसल माना /strong>
ना मैंने
आप
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यह तो बस कुछ
का है फँसानाजिन्हें चाहिए बस लड़ने का बहाना ….हिंदुस्तान तेरा मेरा और अठहिस बहनो का है ठिकाना …….
नहीं हम में कोई बेगाना…
ong>तूने कहा तू अकेली है
मुझे लगता है कैसी यह पहे
अपने ही घर में कैसे
हो गयी अकेली …..
राहुल आनंद