College ki sidhi

प्यारी बेटी,
आज से तुम्हारे पाँव उस चौखट उस शहर से बाहर जा रहे हैं
जहाँ अब तक हर दीवार हर सड़क तुम्हारा नाम जानती थी।

लेकिन दुनिया बहुत बड़ी है, और हमारे ख़्वाब शायद उससे भी बड़े .
अब ख्वाबों का हक़ीक़त से सामना होगा ..
ये कुछ नया होगा ..

हर कोई तुम्हें समझे—
ये ज़रूरी नहीं।
पर तुम खुद को ज़रूर समझना ख़ुद को मत खोना,

सीखना पर बदलना मत
सीखना, पर नकल मत करना।
मित्र बनाना, पर खुद की कीमत पर नहीं।
सवाल पूछना, पर जवाब में अपना आत्म सम्मान की रक्षा करना

ज्ञान का दीप अपने भीतर जलाकर रखना,
क्योंकि यही दीप तुम्हें भीड़ में पहचान देगा।
और याद रखना—

पुस्तकों से ज़्यादा, लोग तुम्हारे शिक्षक होंगे,
और अनुभव, तुम्हारा सबसे बड़ा विश्वविद्यालय।

जो दिखाया जाएगा
वो सब देखेंगे
तुम वो देखना
जो नहीं दिखाया गया है

जो बोला जाएगा
वो सब सुनेंगे
तुम वो सुनना
जो नहीं सुनाया गया है

जाओ बेटा…
तुम्हारे कदमों से राह
को पहचान मिले
और तुम्हारे कमों से
सबको रहा आसान मिले

राहुल आनंद

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