रास्ता मेरा अपना

मैं कभी अपनी ज़िन्दगी में भीड़ के साथ नहीं चल पाया
क्यों की मुझे मालूम है की इस भीड़ में,
मैं तो कभी जीत ही नहीं पाऊंगा

इसीलिए मैंने अपना अलग रास्ता चुना
इस रास्ते में मुझे बहुत मुश्किलें आयीं
और मैं हर रोज़ उनसे लड़ता रहा

क्यों की मुझे मालूम था की ये रास्ता मैंने खुद चुना है
इसीलिए मुझे बहुत मज़ा आया,
इन मुश्किलों से लड़ने में

हाँ इस जीत के लिए मैंने कभी अपनो का साथ नहीं छोढ़ा….

और जब भी जीता मैंने उस जीत में मैंने सबको शामिल किया ….

जीत ना पाऊँ ऐसा हो ना सका
लेकिन हाँ सफ़र का तो बहुत आनंद लिया, पर सिर्फ़ जीत तक

सफ़र में कई रिश्ते बनाये
कई रिश्ते जिए
हमेशा सबको साथ रखा पर रास्ता भी अपना था और मंज़िल भी …

आप अपनी ज़िंदगी में भीड़ को चुने
या अलग रास्ता
निर्णय आपका है ….
पर हर निर्णय में सबको साथ रखें ….

अगर पंख है तो ख़ूब उड़ें
पर लौट के ज़मीन पर ज़रूर आ जाएँ
क्योंकि आपकी कामयाबी पे ताली बजाने वाले सब नीचे ही रहते हैं
…..राहुल आनंद