पक्ष विपक्ष की चर्चा काफ़ी सुनी है और कई लोग कहते है की यही डिमॉक्रेसी है…. पता नहीं….
आरोप प्रत्यारोप का स्तर निचले चरम पर है, यह हमें और कहाँ तक ले जाएगा…… पता नहीं …..
दल बे दल (independents) सभी अपने हिसाब से जोड़ बाक़ी गुना भाग करते हैं पर देश के लिए जो सही हैं (चाहे वो कोई भी करे ) उसका हिसाब बराबर (=) कौन करेगा….पता नहीं….
सत्य असत्य के भ्रम में सभी एसे उलझ गाएँ हैं की डोर का छोर सूझे नाहीं …… अब ईस माँझे को सुलझाने का काम कौन करेगा …. पता नहीं….
पूत सपूत कपूत का सब भेद मिट गया है , अपने स्वार्थ निजाता और जात के फेर में , कई कपूतों के बीच सपूत का चयन कौन करेगा … पता नहीं……
लेकिन कोई ईस सब से दूर हर समय हर दल से किसी ना किसी तरह से राष्ट्र का निर्माण कर्ता रहा है … दलगत राजनीति से परे उनका समान कौन करेगा ……पता नहीं ……
राष्ट्र धृतराष्ट्र से घिरा है …………… ईस …..पता नहीं ……. का पता कौन लगाएगा …..मुझे पता है …..
यह वही कर सकता है जो परिवारवाद , जातिवाद से परे धर्म की स्थापना हेतु राष्ट्र निर्माण के लिए अविरल भाव से सतत प्रयास करे जो हर समय सत्य के रास्ते पर चले ……जैसे गांधी जी, सरदार पटेल ,शास्त्री जी , jaiprakash ji ,Atal ji aur Modi ji ….
एक व्यक्ति जिसकी ऑपज़िशन भी तारीफ़ करें ……जो २४ घंटे देश सेवा करे ……. जो sarhad पर दिवाली मनाए…. जो देश विदेश में समान कमाएँ ……जो दुश्मन के शीश झुकाए…………जो आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएँ … जिसके कामों की फ़ेहरिस्त यहाँ ना समायें………उसका विरोध क्यों करें …. बस अब यही …….पता नहीं …..
मित्रों
आओ करें राष्ट्र अभिवादन, आओ करे राष्ट्र आराधना ….
यही हैं राष्ट् सामवर्धन यही हैं राष्ट्र निर्माननन…..
जय हिंद……